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वैलिडेटर्स

वैलिडेटर्स को GRAM टोकन उधार देना

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  1. अनुमति-मुक्त वैलिडेटर मॉडल: Hipo स्टेक किए हुए GRAM को एक खुले मॉडल के ज़रिए वैलिडेटर्स को उधार देता है — कोई भी वैलिडेटर बोली लगा सकता है, Hipo से किसी मंज़ूरी के बिना।
  2. वैलिडेटर नीलामी मॉडल: हर वैलिडेशन राउंड में वैलिडेटर्स उस रिवॉर्ड दर को जमा करके स्टेक किए हुए GRAM उधार लेने की बोली लगाते हैं जो वे चुकाएँगे। Hipo के कॉन्ट्रैक्ट अपने आप सर्वोत्तम बोलियाँ चुनते हैं, इसलिए स्टेकर्स को उस राउंड में उपलब्ध सर्वोत्तम दर मिलती है।
  3. सुरक्षित प्रक्रिया: स्टेक किए हुए GRAM उधार लेने और रिवॉर्ड्स के वितरण सहित सभी प्रक्रियाएँ Hipo के स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट के ज़रिये सुरक्षित रूप से निष्पादित होती हैं। उपयोगकर्ताओं की निधियों की अखंडता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रोटोकॉल के सुरक्षा ऑडिट किए गए हैं।
  4. वैलिडेटर कोलैटरल: उधार लेने वाले वैलिडेटर को अपना इतना GRAM लॉक करना होता है जो उस राउंड की अधिकतम स्लैशिंग पेनल्टी और उसके वादा किए गए रिवॉर्ड को कवर करे। पेनल्टी उसी कोलैटरल से ली जाती है, स्टेक किए हुए GRAM से नहीं।
आरेख: Hipo प्रोटोकॉल एक वैलिडेटर को GRAM उधार देता है, जो TON पर वैलिडेट करता है और GRAM तथा स्टेकिंग रिवॉर्ड्स लौटाता है।